Gyaan Sangam
  • Home
  • Gyaan Sangam
  • Hindi Quotes
  • Health
Showing posts with label हेल्थ. Show all posts
Showing posts with label हेल्थ. Show all posts

Friday, July 27, 2018

भूख न लगना और खूब भूख लगना -दोनों ही समस्याएं प्राणघातक और गंभीर हो सकती हैं।

 Updesh Kumari     July 27, 2018     हेल्थ     No comments   

जीवित रहने और शारीरिक ऊर्जा के लिए भोजन बहुत जरूरी है सभी व्यक्तियों की भोजन की आदतें अलग -अलग होती हैं। ऐसी स्थिति में खान -पान संबंधी गड़बड़ी से कुछ लोगों का पीड़ित हो जाना स्वभाविक है। खान -पान संबंधी गड़बड़ी मुख्यतः दो प्रकार की होती है। भूख न लगना और खूब भूख लगना। दोनों ही समस्याएं प्राणघातक और गंभीर हो सकती हैं। खान-पान संबंधी गड़बड़ी पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती है। दुनियाभर की पांच प्रतिशत से भी ज्यादा महिलाएं इन दोनों में से किसी न किसी समस्या से पीड़ित होती हैं। इनकी शुरुआत आमतौर पर किशोरावस्था से ही हो जाती है। हम तब इस ओर ध्यान नहीं देते और धीरे -धीरे यह हमारी आदत में शुमार हो जाता है।
लक्षण --भूख न लगने की बीमारी से पीड़ित व्यक्तियों का वजन शरीर के अपेक्षित वजन से काफी कम हो जाता है। इससे शरीर कुपोषण का शिकार होकर काफी कमजोर हो जाता है। इससे शरीर की बीमारियों से लड़ने की शक्ति कम हो जाती है ,जिससे बीमारियों के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ढेर सारा भोजन करने से व्यक्ति का वजन काफी बढ़ जाता है ,जिससे डायबिटीज और हार्ट सहित कई अन्य बीमारियों के पनपने के संभावना बढ़ जाती है।
भूख न लगने का कारण ---1 चिंता या तनाव ---कई लोगों की आदत होती है कि वे छोटी -छोटी बातों को लेकर टेंशन में आ जाते हैं। जब वे चिंतित ,घबराए हुए या तनावग्रस्त होते हैं तो पेट में कुछ ऐसे अम्लों का निर्माण होता है ,जिनसे भूख मर जाती है। इसलिए जहां तक हो सके चिंता से दूर रहें।
2 अरुचि --कई बार व्यक्ति स्वास्थ्य संबंधी किसी समस्या से पीड़ित होते हैं ,जिसके कारण भोजन के प्रति अरुचि पैदा हो जाती है।
3 डायटिंग --बढ़ते वजन को कम करने के चक्कर में कई लोग डायटिंग शुरू कर देते हैं. वे दुबला होने की गोलियां भी खाते हैं ,जिससे वे ऐनरेक्सिया नामक बीमारी के शिकार हो जाते हैं और उनकी भूख मर जाती है।
4 अत्यधिक सतर्क --कई लोग अपने आहार के मामले में भी नकारात्मक रूप से अत्यधिक सतर्क होते हैं। वजन बढ़ जाने के डर से वे हल्का भोजन करते हैं और अत्यधिक कसरत करते हैं। ऐसी स्थिति में कुपोषण या अत्यधिक मेहनत से उन्हें टीबी सहित कई अन्य बीमारियों से पीड़ित होने की संभावना बढ़ जाती है।
           भूख न लगने की बीमारी से निजात पाने में मनोचिकित्सक काफी मददगार साबित हो सकते हैं ,क्योंकि अपनी समस्याओं के संबंध में अपने परिजनों के साथ चर्चा करना कई लोगों के लिए मुश्किल होता है। उपचार में मनोचिकित्सा के साथ ही मेडिकेशन भी जरूरी होता है। ये दोनों अलग -अलग या साथ -साथ भी हो सकती है। सामान्य परिस्थितियों में रोगी इससे ही ठीक हो जाता है। लेकिन किसी कारणवश यदि रोगी इससे ठीक नहीं हो पा रहा हो ,तो समस्या गंभीर हो सकती है। ऐसी स्थिति में रोगी को अस्पताल में भर्ती करा कर उसका विस्तृत स्वास्थ्य परीक्षण कराना चाहिए।




























Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Tuesday, July 24, 2018

अच्छी सेहत का आधार हैं -हमारे चार पोषक तत्व।

 Updesh Kumari     July 24, 2018     हेल्थ     No comments   

अच्छा स्वास्थ्य काफी हद तक आपके खानपान पर निर्भर करता है। फिर भी तमाम ऐसे लोग हैं जिन्हें यह जानकारी नहीं है कि स्वास्थ्य के बुनियादी तत्व क्या हैं ?वस्तुतः विभिन्न पोषक तत्वों जैसे प्रोटीन ,कार्बोहाइड्रेट ,वसा और विटामिनों का अच्छी सेहत को बरकरार रखने में महत्वपूर्ण योगदान है। इन पोषक तत्वों का अपने आहार में संतुलित महत्व देकर आप विभिन्न बीमारियों से दूर रहकर स्वस्थ बने रह सकते हैं पर साथ ही अपने सौंदर्य को भी बरकरार रख सकते हैं। आइये जानते हैं कौन -कौन से हैं ये पोषक तत्व ---
1 प्रोटीन --प्रोटीन का मुख्य कार्य नई कोशिकाओं का निर्माण और पुरानी क्षत -विक्षत कोशिकाओं का निर्माण करना है। कार्य ---प्रोटीन एमीनो एसिड से बनता है ,जो एक -दूसरे से एक कड़ी की तरह जुड़े होते हैं। कुछ एमीनो एसिड शरीर के अंदर हार्मोनों के निर्माण के साथ -साथ शरीर के रोग -प्रतिरोधक तंत्र को भी मजबूती प्रदान करते हैं। प्रोटीन बच्चों के शारीरिक विकास ,गर्भवती महिलाओ व दूध पिलाने वाली माताओं के लिए एक आवश्यक तत्व है। स्रोत --प्रोटीन दूध व दूध से बने पदार्थों ,मांस ,दालों सोयाबीन और सूखे मेवे में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
2 कार्बोहाइड्रेट --कार्बोहाइड्रेट ही वह पोषक तत्व है ,जो शरीर को कोशिकाओं को सबसे जल्दी ऊर्जा प्रदान करता है। शरीर कार्बोहाइड्रेट को ग्लाइकोजन के रूप में गुर्दे और मांसपेशियों में संचित करता है। स्रोत ---केला ,आम अनानास ,अंगूर में कार्बोहाइड्रेट पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा चीनी ,गुड़ ,शहद ,दालें ,अनाजों ,आलू, शककरकंदी चुकंदर आदि भी कार्बोहाइड्रेट के अच्छे स्रोत हैं।
3 वसा --वसा में बहुत अधिक मात्रा में ऊर्जा होती है शरीर की दस से तीस प्रतिशत ऊर्जा की आवश्यकता तेल व वसा से पूरी होती है। जो व्यक्ति अपने आहार में अधिक मात्रा में वसा का प्रयोग करते हैं, उनके शरीर में ग्लूकोज की मात्रा क्षीण होने लगती है जो मधुमेह के खतरे को बढ़ा देता है। स्रोत ----वसा अधिकतर तिलहन, ,मूंगफली , नारियल ,सरसों ,सोयाबीन ,दूध ,घी ,मक्खन ,क्रीम और मछली के तेल आदि में पाया जाता है।
प्रभाव ---शरीर में वसा की कमी से वजन घट जाता है। इस कारण जरा -सा परिश्रम करने पर वह जल्द ही थकान महसूस करने लगता है। वहीं वसा की अधिकता से व्यक्ति का वजन बढ़ जाता है ,जिससे वह मोटापे का शिकार हो जाता है।
4 विटामिन ---विटामिन कई प्रकार के होते हैं। ये व्यक्ति विभिन्न बीमारियों से दूर रखने में सहायक हैं। विटामिन शरीर की चयापचय क्रिया (मेटाबॉलिज्म)को नियंत्रित करने में कारगर है। विटामिन प्रमुख रूप से छह प्रकार के होते हैं -- A ,b ,c ,d ,e और k .---कार्य ---विटामिन ए का मुख्य कार्य आंखों को स्वस्थ रखना है,जो हरी पत्तेदार सब्जियों ,टमाटर ,फल, मक्खन ,घी, दूध ,अंडा और मछली के तेल में पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। विटामिन बी समूह में बी -1,बी -2,बी -3,और बी -12 की गणना की जाती है। इस समूह के विटामिन हृदय ,नाड़ी -तंत्र ,मस्तिष्क ,त्वचा ,आंखों व पाचन तंत्र को सुचारु रूप से संचालित करने में सहायक हैं। विटामिन बी साबुत अनाज ,दालों ,सूखे मेवे और अंकुरित खाद्य पदार्थों में पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।
विटामिन सी शरीर की रोग -प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। यह आवंला ,संतरा ,टमाटर ,अंगूर ,अमरुद और नींबू में पाया जाता है। विटामिन डी हडिड्यों व दांतों को मजबूत बनाने में सहायक है। यह सूर्य की किरणों ,अंडे के पीले भाग ,दूध ,मक्खन और घी में उपलब्ध रहता है। विटामिन ई प्रजनन अंगों को शक्ति प्रदान करता है। साबुत अनाज ,सोयाबीन ,मूंगफली और नारियल विटामिन ई के अच्छे स्रोत हैं। विटामिन के शरीर में रक्त का थक्का जमाने में सहायक है। यह मुख्य रूप से हरी पत्तेदार सब्जियों ,पालक ,मेथी और मूली के पत्ते में पाया जाता है।






























)

























Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Thursday, July 19, 2018

वजन पर रहे नजर अन्यथा हो जाओगे अनेक रोगों के शिकार।

 Updesh Kumari     July 19, 2018     हेल्थ     No comments   

मेडिकल साइंस के सामने मोटापा एक बड़ी चुनौती की तरह  खड़ा है। जरूरत से ज्यादा वजन तमाम तरह की बीमारियों को जन्म देता है और हृदय रोग ,मधुमेह ,गुरदे की बीमारी जोड़ों के दर्द ,गठिया ,पित्ताशय के रोग इत्यादि के लिए  जिम्मेदार  है। मोटापे की वजह से गर्भवती महिला को प्रसव के समय कई जटिलताओं का सामना करना पड़ता है।
एक आम आदमी की तुलना में मोटे आदमी का कोई भी काम करने में ज्यादा समय लगता है। भारी -भरकम शरीर के कारण दुर्घटना की संभावना भी ज्यादा रहती है। परेशानी यहीं पर आकर खत्म नहीं हो जाती ,बल्कि सुस्ती ,पीठ दर्द और पैरों की तकलीफ भी आम हो जाती है। इस वजह से उसे काम मिलने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यही नहीं ,वह लोगों से कतराने भी लगता है।
अधिकतर लोग मोटापे से बचने के लिए नीम -हकीमों की शरण में चले जाते हैं या फिर डायटिंग शुरू कर  देते हैं। ऐसा करते हुए उन्हें खाद्य -पदार्थों से वंचित रहना ही पड़ता है ,साथ ही पैसे का नुकसान भी होता है। कभी -कभी तो शारीरिक जोखिम भी उठाना पड़ता है।
वजन हडिड्यों पर ,लम्बाई पर और चर्बी की मात्रा पर निर्भर करता है। कई लोगों का वजन ज्यादा होता है पर उन्हें हम मोटा  नहीं  कह सकते ,क्योंकि उनके शरीर में चर्बी की मात्रा कम रहती है और मांसपशियों का वजन ही ज्यादा रहता है। जो व्यक्ति ज्यादा कसरत करते हैं ,खासकर  खिलाड़ी ,उनका वजन भी ज्यादा होता है ,लेकिन उन्हें मोटा नहीं कहा जा सकता।
यूं तो मोटापे के कई कारण हो सकते हैं पर मुख्य है व्यक्ति का शारीरिक जरूरत से ज्यादा भोजन ग्रहण करना। मोटापे का इलाज सम्भव है लेकिन ऐसी स्थिति में डाक्टर का मार्गदर्शन बेहद जरूरी है। मोटापे का इलाज करने से पहले मरीज का बाकायदा चेकअप किया जाता है। साथ ही उसके खाने की आदतें ,उसकी दिनचर्या ,पारिवारिक इतिहास सबका पता लगाया जाता है जिससे इलाज में मदद मिल सके। वजन का घटना एक लम्बी प्रक्रिया है। शार्ट कट न अपना कर वजन धीरे -धीरे घटाना चाहिए।
खाने -पीने में सभी खाद्य पदार्थों का संतुलन आवश्यक है ,पर साथ ही यह ध्यान रखना होगा कि हम ज्यादा
फैट फ़ूड जैसे मक्खन ,तेल ,घी ,चॉकलेट ,आइसक्रीम ,तली हुई चीजें जैसे समोसे ,पकौड़े ,नमकीन ,पूरी -कचौरी ,जैम, शहद ,क्रीम के बिस्कुट ,मेवा ,आम ,अंगूर ,चीकू ,पेय पदार्थ ,डिब्बों में बंद खाने आदि से एकदम परहेज करें।
यह तो हम सब जानते हैं कि सिर्फ खान -पान में बदलाव लाने से ही हमारी समस्या का समाधान नहीं होने वाला है। इसके लिए हमें अपनी दिनचर्या में व्यायाम को भी शामिल करना होगा। अगर परेशानी है ,तो शुरू में सिर्फ दस मिनट की सैर से ही आरम्भ करें ,जिसे नियमित समय पर बढ़ा क़र पैंतालीस मिनट तक लाएं। अभ्यास से ही ऊर्जा खर्च होगी और हमारी पाचनशक्ति भी बढ़ेगी।
तकरीबन पांच प्रतिशत मोठे व्यक्ति हारमोनल असंतुलन की वजह से मोटापे के शिकार होते हैं। इस अवस्था में पाचन शक्ति कमजोर पड़ जाती है और ऊर्जा का प्रयोग शरीर में ज्यादा नहीं होता है। आम खाना खाने से भी मोटापा शरीर में आ जाता है। सबसे पहले तो मर्ज का इलाज आवश्यक है। संक्षेप ,में हम यही कहना चाहेंगे कि मोटापा आज की जिंदगी का सबसे बड़ा अभिशाप है ,जिसका मुकाबला हमें सही खानपान और नियमित अभ्यास से करना होगा।


Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Wednesday, July 18, 2018

लाइलाज नहीं होती हकलाहट ,आवश्यकता है अभिभावकों के पर्याप्त स्नेह और सहयोग की।

 Updesh Kumari     July 18, 2018     हेल्थ     No comments   

बहुत से बच्चों को हकलाकर बोलने की आदत होती है ,जो माता -पिता की परेशानी का कारण बन जाती है। होता यह है कि बड़े होने पर भी बच्चे को अपनी इस आदत से छुटकारा नहीं मिल पाता और वह लोगों के उपहास का पात्र बनता है। इस वजह से उसके व्यक्तित्व का विकास नहीं हो पाता। वह अजनबी लोगों से बात करने में घबराने लगता है। सभाओं व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर वह ठीक से बोल नहीं पाता। नतीजन ,वह हीनभावना का शिकार होने लगता है। युवा होने पर भी उसकी हकलाने की आदत नहीं जाती ,तो नौकरी या किसी प्रतियोगी परीक्षा के साक्षात्कार के दौरान उसे इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है।
बोलचाल की भाषा में हकलाने का अर्थ है-- सामान्य या धाराप्रवाह ढंग से बोलने में अयोग्यता। कभी -कभी मानसिक दबाव या घबराहट की वजह से जुबान का लड़खड़ाना भी हकलाहट को जन्म देता है। लेकिन यह उस तरह का हकलाना नहीं माना जाता। हकलाने की आदत में पहले शब्दांश ,व्यंजन या स्वर के स्वाभाविक उच्चारण में कठिनाई महसूस होती है।जीभ मुंह में खिंच -सी जाती है तथा मुंह की मांसपेशियों में स्वतः संकुचन आ जाता है।
विशेषज्ञों का मत है कि हकलाना शारीरिक दोष के अलावा मानसिक कारणों से भी उत्पन्न होता है। बच्चों की हकलाकर बोलने की नकल ,जल्दी बोलने की आदत ,हीनभावना और उनपर मानसिक दबाव के कारण उनमें वाणी दोष का जन्म होता है। शारीरिक कारणों में कुपोषण के कारण हुई बीमारी से भी बच्चों में हकलाने की आदत देखी जाती है। हकलाहट की आदत छुड़ाने के लिए किसी विशेषज्ञ की राय लेना आवश्यक है। साथ ही माता -पिता को भी कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए -

  1. हकलाने के बावजूद बच्चे को खूब पढ़ने तथा बोलने का अभ्यास कराया जाए। 
  2. बोलते वक्त स्वर के उच्चारण के अभ्यास पर ध्यान देना चाहिए ,क्योंकि स्वर ही शब्द और वाणी का प्रमुख आधार होता है। 
  3. बच्चे को सभाओं व समूह -चर्चाओं में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करते रहना चाहिए। 
  4. बच्चे के हकलाने पर उसे न ही झिड़कें और न ही उसकी हंसी उड़ाएं। 
  5. बच्चे को पर्याप्त लाड -प्यार और स्नेह देते रहें। 

























Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

खान -पान का ध्यान रखें डायबिटीज या मधुमेह के रोगी।

 Updesh Kumari     July 18, 2018     हेल्थ     No comments   

डायबिटीज या जिसे हम हिंदी में मधुमेह कहते हैं ,तब होती है ,जब हमारे शरीर में इंसुलिन हारमोन कम बनता है या बिलकुल ही नहीं बनता। इंसुलिन हारमोन पेन्क्रियाज में बनता है और रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करता है। ग्लूकोज से हमें दिन -प्रतिदिन के कामों के लिए ऊर्जा मिलती है।
अगर किसी कारणवश शरीर में इंसुलिन न रहे ,तो खून में ग्लूकोज की मात्रा बहुत अधिक बढ़ जाती है। एक आम व्यक्ति के 100 ग्राम खून में शूगर की मात्रा 70 से 100 मिलीग्राम होनी चाहिए ,लेकिन डायबिटीज होने पर यह मात्रा बढ़ जाती है।
डायबिटीज कई प्रकार की होती है। पहली वह जो पैतृक होती है। इसमें जन्म से ही किसी कारण से बच्चे में इंसुलिन नहीं बनता। इसका कोई इलाज नहीं है  और इसके लिए अपने खान -पान में परहेज के साथ -साथ कृत्रिम इंसुलिन का सहारा लेना पड़ता है।दूसरे प्रकार के मधुमेह का संबंध एक हद तक हमारे रहन -सहन ,यानि हमारे खाने -पीने से है। यह आमतौर पर प्रौढ़ावस्था में होता है और इसका सीधा संबंध मोटापे से है।
लक्षण --मधुमेह के रोगी में विभिन्न लक्षण दिखाई देते हैं -जैसे बार -बार पेशाब आना ,आंखों की रोशनी कम हाना ,शरीर में चुस्ती कम होना और हर समय नींद आते रहना ,जख्मों का जल्दी न भरना ,भूख -प्यास का बढ़ना ,लेकिन वजन कम होना ,त्वचा रूखी -रूखी हो जाना और खुजली होना। इन  लक्षणों के उभरने पर तुरंत खून की जांच करवानी चाहिए। पॉजिटिव रिपोर्ट आते ही डाक्टरी इलाज शुरू कर देना चाहिए।
इलाज --खाने -पीने में बदलाव लाने और नियमित रूप से व्यायाम करने से मधुमेह नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए मधुमेह के रोगो को चावल ,चीनी ,मैदा ,आलू ,चीकू ,अंगूर ,आम आदि नहीं खाने चाहिए और सब्जियों का सेवन ज्यादा करना चाहिए ताकि विटामिन और खनिज का शरीर में अभाव न हो। भूसी वाले आटे का सेवन करना चाहिए ,आटे में सोयाबीन और चने का आटा भी मिला लेना चाहिए। इसमें भोजन संबंधी नियमितता के साथ -साथ नियमित रूप से ब्लड शूगर की जांच करवाते रहना भी जरूरी है। समय पर दवा लेते रहना चाहिए। यह सब करने पर निस्संदेह मधुमेह का रोगी एक सेहतमंद जिंदगी बसर कर सकता हैं। 
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg

Monday, July 16, 2018

चिंता से भी हो सकता अल्सर ,सावधानी बरतें।

 Updesh Kumari     July 16, 2018     हेल्थ     No comments   

आज की भाग-दौड़ भरी जिंदगी में कोई भी व्यक्ति चिंता से मुक्त नहीं है। इसके चलते वह मानसिक तनाव में आ जाता है और कभी -कभी अल्सर का शिकार भी हो जाता है। हमारे पेट में आंतों में से कई प्रकार के रस और तरल द्रव्य निकलते हैं ,जो हमारे भोजन को पचाने में मदद करते है. जब हम मानसिक तनाव में या चिंताग्रस्त होते हैं,तो तेजाबी पदार्थ ज्यादा मात्रा में निकालते हैं जो हमारे पेट और आंतो के बीच की झिल्ली को जला देते हैं। धीरे -धीरे अंदर वाली झिल्ली में घाव हो जाते हैं।
अल्सर की तकलीफ पेट की गैस व अफारे से बिलकुल अलग है। अल्सर से पेट भारी -भारी लगता है ,जिसके कारण मरीज इसे गैस की तकलीफ से अलग नहीं कर पाता है। इस तकलीफ में हमारे पेट में अमाशय और खाने वाली नली (फ़ूड पाइप )के नीचे वाली जगह जहां पेट शुरू होता है ,वहां घाव हो जाता है ,इसे ही अल्सर कहा  जाता  है। जब यह घाव पेट में हो तो गैस्ट्रिक अल्सर और आंत में हो तो पैप्टिक अल्सर कहा जाता है।
अल्सर के कारण --1 जो लोग किसी कारणवश खून की कमी का शिकार हो जाते हैं ,उन्हें तेजाबी मैदा  ज्यादा होता है ,यही तत्व अल्सर पैदा करता है।
2 तेज पेन किलर खाने से अंदर वाली झिल्ली की सहन शक्ति खत्म हो जाती है और उसमें घाव हो जाते हैं।
3 आंत में पेट की सूजन से अंदर की झिल्ली नष्ट हो जाती है।
4 अधिक मात्रा में शराब का सेवन ,ज्यादा सिगरेट पीना ,पान मसाला ,तेज मसालेदार भोजन जैसी सभी चीजें भी अल्सर होने के लिए जिम्मेदार हैं।
इलाज ---अल्सर के इलाज में देरी से नुकसान हो सकता है। अगर अल्सर में खून आ रहा हो ,तो पहले खूनरोका  जाता है। तेज मसालेदार भोजन ,शराब ,सिगरेट पीना बंद कर दे। बीमारी में ज्यादा घबराये नहीं। यदि मरीज तनाव नहीं छोड़ेगा तो उतना ही तेजाबी मैदा  निकलेगा और अल्सर से आराम कम हो जाएगा। मरीज को यह बात पहले ही सोच लेनी चाहिए कि यह बीमारी धीरे -धीरे ठीक होती है। संतुष्टि रखें।  
Read More
  • Share This:  
  •  Facebook
  •  Twitter
  •  Google+
  •  Stumble
  •  Digg
Older Posts Home

About Me

My photo
Updesh Kumari
सुंदर विचारों को लिखकर प्रकट करना मेरी आदत में शुमार है। मैने सन 1995 में हिंदी साहित्य में (शिवप्रसाद का कथा साहित्य ) शोध प्रबंध लिखा था। मुझे अध्यापन कार्य करते हुए पच्चीस वर्ष से ज्यादा हो चुके हैं। विचारों को एकत्रित कर सहेजना मेरी खूबी रही है। मुझे अपने विचार व्यक्त करना भी बहुत अच्छा लगता है। मुझे ये बतलाते हुए गर्व है कि मेरे द्वारा पढ़ाये गये छात्र शत -प्रतिशत परिणाम लाये हैं और उच्च पदों पर कार्यरत हैं। ये कहने की कोई आवश्यकता नहीं है कि विभिन्न कार्यक्रमों को संचालित करने का सदैव अवसर मिलता रहा है। मैं अपने पारिवारिक व कार्यस्थल से पूर्ण संतुष्ट हूँ। लिखना मेरा शौक है मजबूरी नहीं। मै आशा करती हू कि आप मेरे द्वारा लिखे गये को पसंद करेंगें।
View my complete profile

Popular Posts

  • अपशब्दों से अपनी ही वाणी गंदी होती है।
         हमें कभी किसी को गालियाँ नहीं देनी चाहिए ,न ही अपशब्द कहने चाहिए। ऐसा करना अशिष्टता और असभ्यता है गालियों से अपनी ही वाणी और मन दूषित ...
  • बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय।
    माता -पिता हमारे लिए पूजनीय होते हैं लेकिन उनकी वृद्धावस्था में जब हम उनका साथ नहीं दे पाते तो बाद में हमे बड़ा पछतावा होता है। सोहन को वृद्...
  • मानव -शरीर एक घोडा गाड़ी
    मनुष्य शरीर क्या है ?कठोपनिषद में मनुष्य शरीर की तुलना एक घोडा गाड़ी से की गई है मनुष्य के शरीर में दस इंद्रियां -पांच ज्ञानेन्द्रियां -...
  • सुविचार 22/9/2018 - Hindi Quotes
    निष्काम होकर पुरुषार्थ करने वाले को सफलता स्वयमेव प्राप्त होती है। -भारवि  सेवा सबकी करो परन्तु आशा किसी से मत रखो। यह संसार में रहने का...
  • बात पते की 27/7/2018 - Hindi Quotes
    जो भयभीत न हो ,वह आक्रामक नहीं होता। जिस व्यक्ति को कोई डर न हो वही स्वतंत्र व शांति से पूर्ण व्यक्ति है। -जेकृष्णमूर्ति  में प्रजातंत्र...

Blog Archive

  • ▼  2018 (171)
    • ▼  September (32)
      • सुविचार 27/9/2018 - Hindi Quotes
      • सुविचार 26/9/2018 - Hindi Quotes
      • सुविचार 25/9/2018 - Hindi Quotes
      • सुविचार 24/9/2018 - Hindi Quotes
      • सुविचार 23/9/2018 - Hindi Quotes
      • सुविचार 22/9/2018 - Hindi Quotes
      • सुविचार 21/9/2018 - Hindi Quotes
      • सुविचार 20/9/2018 Hindi Quotes
      • सुविचार 20/9/2018 - Hindi Quotes
      • सुविचार 19/9/2018 - Hindi Quotes
      • सुविचार 18/9/2018 - Hindi Quotes
      • सुविचार 17/9/2018 - Hindi Quotes
      • सुविचार 16/9/2018 -Hindi Quotes
      • सुविचार 14/9/2018 - Hindi Quotes
      • सुविचार 15/9/2018 - Hindi Quotes
      • सुविचार 13/9/2018 - Hindi Quotes
      • सुविचार 12/9/2018 - Hindi Quotes
      • सुविचार 11/9/2018 Hindi Quotes
      • सुविचार 10/9/2018 - Hindi Quotes
      • सुविचार 9/9/2018 - Hindi Quotes
      • सुविचार 8/8/2018 - Hindi Quotes
      • सुविचार 7/8/2018 - Hindi Quotes
      • अपशब्दों से अपनी ही वाणी गंदी होती है।
      • सुविचार 6/9/2018 - Hindi Quotes
      • सुविचार 5/9/2018 - Hindi Quotes
      • माता के साथ -साथ पिता को भी देवतुल्य समझकर उनकी प...
      • सुविचार 4/9/2018 - Hindi Quotes
      • माँ का कलेजा बोला --मेरे बच्चे ! चोट तो नहीं आई कह...
      • सुविचार 3/9/2018 - Hindi Quotes
      • सुविचार 2/9/2018 - Hindi Quotes
      • सुविचार 1/9/2018 - Hindi Quotes
      • मोक्ष प्राप्त करने का अवसर केवल मनुष्य जन्म में ही...
    • ►  August (36)
    • ►  July (58)
    • ►  June (45)

CATEGORIES

Gyaan Sangam (64) Hindi Quotes (102) हेल्थ (6)

Total Pageviews

Sample Text

Copyright © Gyaan Sangam | Powered by Blogger
Design by Sachin | Managed by Updesh Kumari